भारत का स्वतंत्रता संग्राम विश्व के सबसे लंबे और महत्वपूर्ण संघर्षों में से एक था। यह संघर्ष भारतीयों द्वारा अंग्रेजों के अत्याचार, आर्थिक शोषण और राजनीतिक नियंत्रण के खिलाफ लड़ा गया। भारत में स्वतंत्रता की भावना धीरे-धीरे विकसित हुई, लेकिन इसका पहला बड़ा और संगठित रूप 1857 के विद्रोह में दिखाई दिया। इसी कारण इसे भारत के स्वतंत्रता संग्राम की शुरुआत माना जाता है।
अंग्रेजों का भारत में आगमन
भारत में अंग्रेज सबसे पहले व्यापार करने के उद्देश्य से आए थे। British East India Company की स्थापना 1600 ई. में हुई। प्रारम्भ में अंग्रेजों ने भारत के विभिन्न क्षेत्रों में व्यापारिक केंद्र स्थापित किए, लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने भारतीय राजनीति में हस्तक्षेप करना शुरू कर दिया।
अंग्रेजों की शक्ति बढ़ने के कारण
- भारतीय राज्यों में आपसी संघर्ष
- आधुनिक हथियार और सैन्य शक्ति
- कूटनीतिक नीतियाँ
- “फूट डालो और राज करो” की नीति
प्लासी का युद्ध (1757) और बक्सर का युद्ध (1764) अंग्रेजों की विजय के महत्वपूर्ण पड़ाव बने। इन युद्धों के बाद अंग्रेजों का भारत पर नियंत्रण तेजी से बढ़ने लगा।
अंग्रेजी शासन के प्रति असंतोष के कारण
भारतीयों में अंग्रेजों के खिलाफ धीरे-धीरे असंतोष बढ़ने लगा। इसके पीछे कई कारण थे।
1. राजनीतिक कारण
अंग्रेज भारतीय राज्यों को अपने अधीन करने के लिए अनेक नीतियाँ अपनाते थे।
लॉर्ड डलहौजी की “Doctrine of Lapse”
इस नीति के अनुसार यदि किसी राजा का कोई सगा उत्तराधिकारी नहीं होता था, तो उसका राज्य अंग्रेजों के अधीन कर लिया जाता था।
इस नीति से प्रभावित राज्य:
- झाँसी
- सतारा
- नागपुर
- अवध
इससे भारतीय राजाओं में भारी असंतोष फैल गया।
2. आर्थिक कारण
अंग्रेजों ने भारत की अर्थव्यवस्था को अपने लाभ के लिए इस्तेमाल किया।
किसानों की स्थिति
- भारी कर वसूले जाते थे
- अकाल के समय भी कर नहीं घटाए जाते थे
- किसान कर्ज में डूब गए
कुटीर उद्योगों का विनाश
भारत के हस्तशिल्प और कपड़ा उद्योग को अंग्रेजों ने नष्ट कर दिया। भारतीय वस्त्रों की जगह ब्रिटेन में बने कपड़े भारत में बेचे जाने लगे।
धन का निष्कासन
भारत का धन लगातार इंग्लैंड भेजा जा रहा था, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था कमजोर होती गई।
3. सामाजिक और धार्मिक कारण
अंग्रेज भारतीय समाज और धर्म में हस्तक्षेप करने लगे।
- ईसाई मिशनरियों को बढ़ावा दिया गया
- भारतीयों को लगा कि अंग्रेज उनका धर्म बदलना चाहते हैं
- सामाजिक सुधारों को कई लोगों ने धार्मिक हस्तक्षेप माना
इससे जनता में भय और असंतोष फैल गया।
4. सैन्य कारण
भारतीय सैनिकों के साथ भेदभाव किया जाता था।
- वेतन कम था
- पदोन्नति नहीं मिलती थी
- अंग्रेज अधिकारी भारतीय सैनिकों को नीचा समझते थे
इससे सैनिकों में नाराजगी बढ़ती गई।
1857 का विद्रोह – स्वतंत्रता संग्राम की शुरुआत
Indian Rebellion of 1857 भारत का पहला बड़ा स्वतंत्रता संग्राम था। इसे “प्रथम स्वतंत्रता संग्राम” भी कहा जाता है।
यह विद्रोह 10 मई 1857 को मेरठ से शुरू हुआ।
विद्रोह का तात्कालिक कारण
अंग्रेजों ने नई एनफील्ड राइफल सैनिकों को दी। इसकी कारतूसों पर गाय और सूअर की चर्बी होने की अफवाह फैली।
- हिन्दू सैनिक गाय को पवित्र मानते थे
- मुस्लिम सैनिक सूअर को अपवित्र मानते थे
कारतूस को दाँत से काटना पड़ता था, जिससे सैनिकों की धार्मिक भावनाएँ आहत हुईं।
मंगल पांडे का योगदान
Mangal Pandey ने अंग्रेज अधिकारियों के खिलाफ विद्रोह किया। उन्हें 8 अप्रैल 1857 को फाँसी दे दी गई।
उनका बलिदान सैनिकों के लिए प्रेरणा बना।
विद्रोह का विस्तार
मेरठ
10 मई 1857 को सैनिकों ने विद्रोह कर दिया और दिल्ली की ओर बढ़े।
दिल्ली
दिल्ली पहुँचकर सैनिकों ने Bahadur Shah Zafar को भारत का सम्राट घोषित किया।
कानपुर
यहाँ विद्रोह का नेतृत्व Nana Sahib ने किया।
झाँसी
Rani Lakshmibai ने अंग्रेजों के विरुद्ध वीरतापूर्वक युद्ध किया।
उनका प्रसिद्ध कथन था:
“मैं अपनी झाँसी नहीं दूँगी।”
ग्वालियर
Tatya Tope ने संघर्ष जारी रखा।
लखनऊ
यहाँ विद्रोह का नेतृत्व Begum Hazrat Mahal ने किया।
