भारत के स्वतंत्रता संग्राम में बिहार का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण और गौरवपूर्ण रहा है। इस भूमि ने ऐसे अनेक महान स्वतंत्रता सेनानियों को जन्म दिया जिन्होंने अपने साहस, त्याग और नेतृत्व से देश को आज़ादी दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से लेकर 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन तक बिहार के किसानों, छात्रों, महिलाओं और क्रांतिकारियों ने ब्रिटिश शासन के विरुद्ध संघर्ष किया।
महात्मा गांधी के नेतृत्व में 1917 का चंपारण सत्याग्रह भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का एक ऐतिहासिक मोड़ साबित हुआ, जिसने पूरे देश में अहिंसक संघर्ष की नई दिशा दी।
1. 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में बिहार की भूमिका
वीर कुंवर सिंह बिहार के सबसे प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी थे।
वीर कुंवर सिंह का योगदान
- लगभग 80 वर्ष की आयु में अंग्रेजों के विरुद्ध युद्ध का नेतृत्व किया।
- भोजपुर जिले के जगदीशपुर के जमींदार थे।
- आरा, आज़मगढ़ और जगदीशपुर सहित अनेक स्थानों पर अंग्रेजों को पराजित किया।
- युद्ध के दौरान घायल होने पर उन्होंने अपना घायल हाथ काटकर गंगा नदी को समर्पित कर दिया, जो उनके अद्वितीय साहस और बलिदान का प्रतीक माना जाता है।
- उनकी वीरता ने पूरे देश के क्रांतिकारियों को प्रेरित किया।
2. चंपारण सत्याग्रह (1917)
महात्मा गांधी ने भारत में अपना पहला सफल सत्याग्रह बिहार के चंपारण से प्रारंभ किया।
पृष्ठभूमि
अंग्रेज नील किसानों को ‘तीनकठिया प्रथा’ के तहत जबरन नील की खेती करने के लिए मजबूर करते थे। इससे किसान अत्यधिक शोषण और गरीबी का सामना कर रहे थे।
मुख्य नेता
- महात्मा गांधी
- डॉ. राजेंद्र प्रसाद
- राजकुमार शुक्ल
- ब्रजकिशोर प्रसाद
- अनुग्रह नारायण सिन्हा
उपलब्धियाँ
- तीनकठिया प्रथा समाप्त हुई।
- किसानों को न्याय मिला।
- गांधीजी राष्ट्रीय नेता के रूप में स्थापित हुए।
- पूरे भारत में सत्याग्रह और अहिंसा की शक्ति का संदेश पहुँचा।
3. डॉ. राजेंद्र प्रसाद का योगदान
डॉ. राजेंद्र प्रसाद बिहार ही नहीं, पूरे भारत के प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी थे।
मुख्य योगदान
- असहयोग आंदोलन में सक्रिय भागीदारी।
- चंपारण सत्याग्रह में गांधीजी के सहयोगी।
- सविनय अवज्ञा आंदोलन में भाग लिया।
- कई बार अंग्रेजों द्वारा जेल भेजे गए।
- स्वतंत्र भारत के प्रथम राष्ट्रपति बने।
4. असहयोग आंदोलन (1920–22) में बिहार
महात्मा गांधी के आह्वान पर बिहार के हजारों विद्यार्थियों, शिक्षकों, वकीलों और आम नागरिकों ने आंदोलन में भाग लिया।
मुख्य गतिविधियाँ
- सरकारी विद्यालयों और कॉलेजों का बहिष्कार।
- विदेशी वस्तुओं का त्याग।
- खादी और स्वदेशी वस्तुओं का प्रचार।
- जनसभाएँ और शांतिपूर्ण प्रदर्शन।
पटना, गया, मुजफ्फरपुर और भागलपुर आंदोलन के प्रमुख केंद्र बने।
5. सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930)
बिहार के लोगों ने नमक कानून सहित कई ब्रिटिश कानूनों का शांतिपूर्ण विरोध किया।
मुख्य योगदान
- कर न देने का आंदोलन।
- विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार।
- स्वदेशी उद्योगों को बढ़ावा।
- हजारों लोगों ने गिरफ्तारी दी।
6. भारत छोड़ो आंदोलन (1942)
1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में बिहार पूरे देश के सबसे सक्रिय राज्यों में से एक था।
बिहार की भूमिका
- छात्रों ने आंदोलन का नेतृत्व किया।
- रेल और संचार व्यवस्था को बाधित कर अंग्रेजी शासन का विरोध किया।
- अनेक सरकारी कार्यालयों के सामने प्रदर्शन हुए।
- हजारों लोगों को गिरफ्तार किया गया।
- कई स्थानों पर भूमिगत क्रांतिकारी गतिविधियाँ संचालित हुईं।
7. जयप्रकाश नारायण का योगदान
जयप्रकाश नारायण भारत छोड़ो आंदोलन के प्रमुख नेताओं में से थे।
मुख्य योगदान
- 1942 में हजारीबाग जेल से साहसिक पलायन।
- भूमिगत आंदोलन का नेतृत्व।
- युवाओं को स्वतंत्रता संग्राम से जोड़ना।
- अंग्रेजी शासन के विरुद्ध जनजागरण।
8. योगेंद्र शुक्ल
योगेंद्र शुक्ल बिहार के प्रमुख क्रांतिकारियों में गिने जाते हैं।
योगदान
- क्रांतिकारी संगठनों से जुड़े।
- कई वर्षों तक कारावास झेला।
- भूमिगत स्वतंत्रता आंदोलन को मजबूत किया।
- अनेक युवा क्रांतिकारियों का मार्गदर्शन किया।
9. बिहार के अन्य प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी
- श्रीकृष्ण सिंह
- अनुग्रह नारायण सिन्हा
- मज़हरुल हक़
- ब्रजकिशोर प्रसाद
- राजकुमार शुक्ल
- सैयद महमूद
10. महिलाओं का योगदान
बिहार की महिलाओं ने भी स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भूमिका निभाई।
उनका योगदान—
- विदेशी वस्त्रों का बहिष्कार
- खादी का प्रचार
- सत्याग्रह में भागीदारी
- क्रांतिकारियों को आश्रय देना
- जनजागरण अभियान चलाना
महिलाओं की भागीदारी ने स्वतंत्रता आंदोलन को जन-आंदोलन का स्वरूप प्रदान किया।
