भारत में ब्रिटिश शासन की शुरुआत किसी एक दिन या एक ही युद्ध से नहीं हुई। अंग्रेज़ पहले व्यापारी के रूप में भारत आए थे, लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने राजनीतिक मामलों में हस्तक्षेप करना शुरू किया। सैन्य शक्ति, कूटनीति, षड्यंत्र और आर्थिक नीतियों के माध्यम से उन्होंने भारतीय राज्यों पर अपना प्रभाव बढ़ाया। भारत में ब्रिटिश सत्ता की वास्तविक शुरुआत बंगाल से मानी जाती है, क्योंकि यही वह क्षेत्र था जहाँ अंग्रेज़ों ने पहली बार स्थायी राजनीतिक और आर्थिक नियंत्रण स्थापित किया।
भारत में अंग्रेज़ों का आगमन
31 दिसंबर 1600 को इंग्लैंड की महारानी एलिज़ाबेथ प्रथम ने ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को पूर्वी देशों के साथ व्यापार करने का अधिकार दिया। इसके बाद कंपनी ने भारत के विभिन्न स्थानों पर व्यापारिक केंद्र (फैक्ट्रियाँ) स्थापित किए।
प्रारंभ में अंग्रेज़ों का उद्देश्य केवल व्यापार करना था। वे भारत से सूती वस्त्र, रेशम, मसाले, नील, नमक, चाय और अन्य बहुमूल्य वस्तुओं का व्यापार करते थे। धीरे-धीरे उन्होंने अपनी सैन्य शक्ति बढ़ाई और भारतीय शासकों के आपसी मतभेदों का लाभ उठाकर राजनीतिक हस्तक्षेप शुरू कर दिया।
बंगाल का महत्व
18वीं शताब्दी में बंगाल भारत का सबसे समृद्ध प्रांत था। यहाँ की उपजाऊ भूमि, विकसित कृषि, कपड़ा उद्योग, रेशम, नील और समुद्री व्यापार के कारण यह अत्यंत धनवान क्षेत्र माना जाता था। बंगाल पर नियंत्रण का अर्थ था विशाल आर्थिक संसाधनों पर अधिकार।
उस समय बंगाल के नवाब सिराजुद्दौला थे, जिन्होंने अंग्रेज़ों की बढ़ती गतिविधियों और किलाबंदी का विरोध किया। अंग्रेज़ नवाब की अनुमति के बिना अपनी सैन्य शक्ति बढ़ा रहे थे, जिससे दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ गया।
प्लासी का युद्ध (23 जून 1757)
युद्ध के कारण
प्लासी के युद्ध के पीछे कई महत्वपूर्ण कारण थे—
- अंग्रेज़ों द्वारा बिना अनुमति किलों की मरम्मत और किलाबंदी।
- कंपनी द्वारा करों से बचने के लिए विशेष अधिकारों का दुरुपयोग।
- नवाब सिराजुद्दौला का अंग्रेज़ों पर नियंत्रण स्थापित करने का प्रयास।
- अंग्रेज़ों द्वारा बंगाल के दरबार के प्रभावशाली लोगों को अपने पक्ष में करना।
- नवाब के सेनापति मीर जाफर और अन्य अधिकारियों के साथ अंग्रेज़ों की गुप्त साज़िश।
युद्ध का विवरण
23 जून 1757 को प्लासी (वर्तमान पश्चिम बंगाल) में अंग्रेज़ों और नवाब सिराजुद्दौला की सेनाओं के बीच युद्ध हुआ। अंग्रेज़ सेना का नेतृत्व रॉबर्ट क्लाइव कर रहे थे।
युद्ध के दौरान मीर जाफर और उनके समर्थकों ने विश्वासघात किया और नवाब की सहायता नहीं की। परिणामस्वरूप सिराजुद्दौला की सेना कमजोर पड़ गई और अंग्रेज़ों ने विजय प्राप्त कर ली।
प्लासी के युद्ध के परिणाम
प्लासी का युद्ध भारतीय इतिहास का एक निर्णायक मोड़ माना जाता है।
इसके प्रमुख परिणाम निम्नलिखित थे—
- सिराजुद्दौला पराजित हुए और बाद में उनकी हत्या कर दी गई।
- मीर जाफर को बंगाल का नवाब बनाया गया।
- अंग्रेज़ों को भारी धनराशि और व्यापारिक सुविधाएँ प्राप्त हुईं।
- बंगाल की राजनीति पर अंग्रेज़ों का प्रभाव स्थापित हो गया।
- भारत में ब्रिटिश साम्राज्य की नींव रखी गई।
हालाँकि 1757 के बाद भी बंगाल का नवाब औपचारिक रूप से बना रहा, लेकिन वास्तविक शक्ति अंग्रेज़ों के हाथ में आने लगी।
बक्सर का युद्ध (22 अक्टूबर 1764)
प्लासी के बाद अंग्रेज़ों की शक्ति और बढ़ गई। लेकिन बंगाल के नए नवाब मीर कासिम अंग्रेज़ों के हस्तक्षेप से असंतुष्ट थे। उन्होंने अंग्रेज़ों का विरोध किया और अवध के नवाब शुजाउद्दौला तथा मुगल सम्राट शाह आलम द्वितीय के साथ मिलकर अंग्रेज़ों के विरुद्ध युद्ध किया।
22 अक्टूबर 1764 को बक्सर में निर्णायक युद्ध हुआ।
अंग्रेज़ों ने इस संयुक्त सेना को पराजित कर दिया।
दीवानी अधिकार (1765)
बक्सर की विजय के बाद 1765 ई. में इलाहाबाद की संधि हुई।
मुगल सम्राट शाह आलम द्वितीय ने ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को—
- बंगाल
- बिहार
- उड़ीसा
की दीवानी (राजस्व वसूली का अधिकार) प्रदान कर दी।
यही वह समय था जब अंग्रेज़ केवल व्यापारी नहीं रहे, बल्कि भारत के बड़े भूभाग के वास्तविक शासक बन गए।
ब्रिटिश सत्ता का विस्तार
बंगाल पर नियंत्रण स्थापित करने के बाद अंग्रेज़ों ने धीरे-धीरे पूरे भारत में अपना शासन फैलाया।
उन्होंने विभिन्न नीतियों का उपयोग किया—
- सहायक संधि (Subsidiary Alliance)
- लैप्स का सिद्धांत (Doctrine of Lapse)
- युद्ध और विजय
- राजनीतिक षड्यंत्र
- आर्थिक नियंत्रण
इन नीतियों के माध्यम से मैसूर, मराठा राज्य, पंजाब, अवध, सिंध तथा अनेक अन्य भारतीय राज्यों पर अधिकार स्थापित किया गया।
बंगाल पर कब्ज़े का भारतीय इतिहास में महत्व
बंगाल पर अधिकार प्राप्त करना अंग्रेज़ों के लिए सबसे बड़ी सफलता थी क्योंकि—
- उन्हें विशाल आर्थिक संसाधन प्राप्त हुए।
- सेना के खर्च के लिए पर्याप्त धन मिलने लगा।
- भारत में राजनीतिक हस्तक्षेप आसान हो गया।
- अन्य भारतीय राज्यों को जीतने का मार्ग खुल गया।
- ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी एक व्यापारिक संस्था से राजनीतिक शक्ति बन गई।
इसी कारण अधिकांश इतिहासकार 1757 के प्लासी के युद्ध को भारत में ब्रिटिश शासन की वास्तविक शुरुआत मानते हैं।
